तेरे नैना ऐसे सखी
बांधे मुझे एक डोर की तरह
देखता रहू तुझे बस यूंही
ये लम्हा बस जाये अब ठहर
पलके न झुकाना अच्छी लगती है ये टकटकी
जानना चाहता हु,क्या है तू मेरे बारे में सोचती
मुस्कुराकर देखना तेरा सितम ढा जाता है
और तिनके की तरह मेरा दिल चुरा जाता है
पास होकर भी पास नै तू,न जाने ये रब क्या चाहता है
तडपाती है तू इतना जब कोई बैर भी नहीं
पर न जाने तेरा मेरा ये क्या अजब नाता है
बस बता देना कब आएगी उस राह पर
रहूँगा बैठा आन्हे भर कर यूँ ही :)
एक ईमारत लैब ए जमुना ,वाही अंदाज ए अदा
मुगलिया दौर की गम्माज़ नजर आती है
जब भी महताब के चाँद की हलकी सी झलक पड़ती है
चाँद के अक्स पर मुमताज नजर आती है
ताज है एक ईमारत तस्लीम,मुझे बंद ए जर,तुझे एजाज नजर आती है
मैंने रिसते हुए देखा है गरीबो का लहू,और तुझको हस्ती हुई मुमताज नजर आती है
एक ख़ामोशी सी उसकी जुबान पर,कसक छोड़ जाती है मेरे दिल में
हम ये सोच परेशां है खता क्या हुई हमसे, और वो राह तक रही मेरा हाल ए दिल सुनाने को
मैंने उसे कहा अरे ओ पत्थर दिल इस आशिक को बेवफाई पसंद नहीं ..
वो मुस्कुराई और बस इतना कहा..
ए जान ए जिगर,कह लेना जितना बुरा चाहे तू,बस इस फलक निहारने दे तू मुझे :)
एक अजीब सा भोलापन है उसके अक्स पर..
मासूमियत में उसकी मुझे खुदा नज़र आता है
जब वो हसे तो ऐसा लगे हर ख्वाहिश पूरी हो गयी हो मेरी
और जब रूठती है तो मानाने में मजा आता है
और मुस्कुराये तो साला दिन बन जाता है
जी करता है राह पर लेट जाऊ उसकी,काटें उसे चुभे तो दर्द यहाँ होता है
दुआ मांगता हु हर ख़ुशी मिले उसे,सजदा तो उसकी आँखों में नजर आता है
तलात्लुम वलवले हैजान अरमान
सब उसके जाने से रुखसत हो चुके थे..
यकीं था न हसना है न रोना है,कुछ इतना हस चुके थे,रो चुके थे
किसी ने आज अंगड़ाई लेकर नजर में रेशमी गिरहें लगा दी
तलात्लुम वलवले हैजान अरमान,फिर एक चिंगारी मुस्कुरा उठी
वो सावन के झूले बहूत याद आते है
याद आती है तेरी अंगड़ाई,आज रैना बीत गयी पर तुम न आई
तेरे इंतज़ार में लाखो इन्तेकाल हो चुके मेरे, बस पलक बिछाये रहता हु तेरी
कभी तो देखेगी वो घरौंदा जो बनाया मैंने तेरे लिए..
डरता हु क्या ऐसे खतम होगी प्रेम कहानी मेरी..
उस ठिठुरती सर्दी में ओस की बूंदों पर चलना तुम्हारा
आज न वो सर्दी है,न ही तू है, पर न जाने क्यूँ ठिठुरन सी लगती है
न चेहरे पे हंसी न कोई गम महसूस होता ,बस आँखों में आंसू से आ जाते है
वो सावन के झूले बहुत याद आते है
वो सावन के झूले बहुत याद आते है
बांधे मुझे एक डोर की तरह
देखता रहू तुझे बस यूंही
ये लम्हा बस जाये अब ठहर
पलके न झुकाना अच्छी लगती है ये टकटकी
जानना चाहता हु,क्या है तू मेरे बारे में सोचती
मुस्कुराकर देखना तेरा सितम ढा जाता है
और तिनके की तरह मेरा दिल चुरा जाता है
पास होकर भी पास नै तू,न जाने ये रब क्या चाहता है
तडपाती है तू इतना जब कोई बैर भी नहीं
पर न जाने तेरा मेरा ये क्या अजब नाता है
बस बता देना कब आएगी उस राह पर
रहूँगा बैठा आन्हे भर कर यूँ ही :)
एक ईमारत लैब ए जमुना ,वाही अंदाज ए अदा
मुगलिया दौर की गम्माज़ नजर आती है
जब भी महताब के चाँद की हलकी सी झलक पड़ती है
चाँद के अक्स पर मुमताज नजर आती है
ताज है एक ईमारत तस्लीम,मुझे बंद ए जर,तुझे एजाज नजर आती है
मैंने रिसते हुए देखा है गरीबो का लहू,और तुझको हस्ती हुई मुमताज नजर आती है
एक ख़ामोशी सी उसकी जुबान पर,कसक छोड़ जाती है मेरे दिल में
हम ये सोच परेशां है खता क्या हुई हमसे, और वो राह तक रही मेरा हाल ए दिल सुनाने को
मैंने उसे कहा अरे ओ पत्थर दिल इस आशिक को बेवफाई पसंद नहीं ..
वो मुस्कुराई और बस इतना कहा..
ए जान ए जिगर,कह लेना जितना बुरा चाहे तू,बस इस फलक निहारने दे तू मुझे :)
एक अजीब सा भोलापन है उसके अक्स पर..
मासूमियत में उसकी मुझे खुदा नज़र आता है
जब वो हसे तो ऐसा लगे हर ख्वाहिश पूरी हो गयी हो मेरी
और जब रूठती है तो मानाने में मजा आता है
और मुस्कुराये तो साला दिन बन जाता है
जी करता है राह पर लेट जाऊ उसकी,काटें उसे चुभे तो दर्द यहाँ होता है
दुआ मांगता हु हर ख़ुशी मिले उसे,सजदा तो उसकी आँखों में नजर आता है
तलात्लुम वलवले हैजान अरमान
सब उसके जाने से रुखसत हो चुके थे..
यकीं था न हसना है न रोना है,कुछ इतना हस चुके थे,रो चुके थे
किसी ने आज अंगड़ाई लेकर नजर में रेशमी गिरहें लगा दी
तलात्लुम वलवले हैजान अरमान,फिर एक चिंगारी मुस्कुरा उठी
वो सावन के झूले बहूत याद आते है
याद आती है तेरी अंगड़ाई,आज रैना बीत गयी पर तुम न आई
तेरे इंतज़ार में लाखो इन्तेकाल हो चुके मेरे, बस पलक बिछाये रहता हु तेरी
कभी तो देखेगी वो घरौंदा जो बनाया मैंने तेरे लिए..
डरता हु क्या ऐसे खतम होगी प्रेम कहानी मेरी..
उस ठिठुरती सर्दी में ओस की बूंदों पर चलना तुम्हारा
आज न वो सर्दी है,न ही तू है, पर न जाने क्यूँ ठिठुरन सी लगती है
न चेहरे पे हंसी न कोई गम महसूस होता ,बस आँखों में आंसू से आ जाते है
वो सावन के झूले बहुत याद आते है
वो सावन के झूले बहुत याद आते है
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